गर्मी में पेट की बीमारियों के प्रति रहें ज्यादा सतर्क, लू से बचाव भी जरूरी, पढ़‍िए विशेषज्ञ की सलाह * ENTV

गर्मी में पेट की बीमारियों के प्रति रहें ज्यादा सतर्क, लू से बचाव भी जरूरी, पढ़‍िए विशेषज्ञ की सलाह

 पेट से ही बीमारियां जन्म लेती हैं। इसलिए अपने स्वच्छ खानपान का सभी ध्यान रखें। ठंड से ज्यादा गर्मियों में पेट संबंधित बीमारियां बढ़ जाती हैं। गर्मियों में पेट का ख्याल रखना और भी जरूरी हो जाता है। हीट स्ट्रोक यानि अत्याधिक गर्मी और लू से भी बचाव जरूर करें। पेट और लिवर की बीमारियों की पहचान के लिए तत्काल अपने नजदीकी विशषज्ञ चिकित्सक से मिलें। ज्यादा जरूरी है कि स्वयं अपने उपचार को न अपनाएं। यह कहना है मैहतपुर के आर्य अस्पताल के गैस्ट्रोएंट्रोलाजिस्ट डाक्‍टर दीपक आर्य का। डा दीपक पोलैंड से फैलोशिप रह चुके हैं और पेट, आंत, लिवर, खाने की नली आदि के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने दैनिक जागरण के पत्रकार सुरेश बसन से गर्मी जनित पेट संबंधित बीमारियों को लेकर साक्षात्कार के दौरान महत्वपूर्ण बातें साझा की और लोगों को पेट का ख्याल रखने के परामर्श दिए।

प्रश्न: पेट की बीमारियों की शुरुआत कैसे होती है और इसकी रोकथाम के लिए क्या करें ?

-गर्मियों में अकसर पेट संबंधित बीमारियां ज्यादा बढ़ जाती हैं। गलत खानपान के कारण पेट में बैक्टीरिया जाग जाते हैं। यहीं से हमारे लिए समस्या खड़ी हो जाती है। इसलिए स्वछ खाना खाएं, उबाल कर ठंडा कर पानी पीएं, खाना बनाने से पहले अच्छे से धोएं, कच्चा न खाएं, खीरा, ककड़ी, तरबूज आदि को भी धोकर खाएं, क्योंकि इसमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है। धोकर खाने से पेट में कीटाणु आदि नहीं जाएंगे। अन्यथा पेट खराब और दस्त आदि की समस्या को यह पैदा कर सकता है। दूध को भी उबाल कर पीएं।

प्रश्न: पेट की बीमारियों की पहचान कैसे करें ?

गर्मियों में गलत ढंग से खानपान के कारण डायरिया हो जाता है। पतले मल के साथ खून जैसी समस्या भी सामने आती है। पेट गड़बड़ है तो सबसे पहले पेन होगी, भूख कम लगेगी, पेट में मरोड़े आएंगी, मल बार बार और मन कच्चा कच्चा महसूस होगा। शरीर में कमजोरी और भूख कम लगेगी। ऐसे हाल में तत्काल विशेषज्ञ डाक्टर से मिले। उपचार खुद न करें, नहीं तो यह बीमारी तेजी से फैलती है और परेशानी बढ़ती है। पेट को स्वस्थ्य रखने के लिए स्वस्थ खानपान, गर्मी एवं लू से बचाव करें, ज्यादा पानी पीएं, लिक्विड की मात्रा लें। तीन टाइम खाना खाएं। चिकित्सीय परामर्श के बाद ब्लड टेस्ट, लैब टेस्ट, एंडोस्कोपी दूरबीन जांच, अल्ट्रासाउंड या स्टूल टेस्ट मरीज के लक्षणों के हिसाब कराया जाता है।

प्रश्न: पेट की गंभीर बीमारियों में कौन से रोग शामिल हैं ?

-पेट की बीमारियों में अल्सर, आंतड़ियों में अलसर्स, कीटाणु से लीवर और पेंकरियाज में घातक इंफेक्शन हो जाता है। इसके लिए पेट के छालों से इंफेक्शन हो जाता है। लिवर एमीबावयसिस बीमारी बन जाती है। इसमें हेपाटिक में बड़े बड़े फोड़े बन जाते हैं। जोकि घातक है, आगे चलकर यह गंभीर और कई बीमारियों के जनक बनते हैं।

प्रश्न: बच्चाें के संबंध पेट को स्वस्थ रखने के लिए क्या परामर्श देंगे?

-बच्चों में अकसर पेट के कीड़े पाए जाते हैं। यह मिट्टी, चौक व नीचे जमीन से उठाई गंदी चीजों के मुहं में डालने और खराब चीजों के सेवन से होता है। इसे बच्चों को खाने से राेकें। पेरेंट्स ध्यान रखें, इससे बच्चों के पेट में इंफेक्शन होता है। समय पर डाक्टर की सलाह लें, समयानुसार बच्चों की डिवोरमिंग चिकित्सीय परामर्श के अनुसार कराते रहें। हां बच्चों को अच्छे से उबला हुआ दूध ही पिलाएं।

प्रश्न: लोगों को क्या परामर्श देंगे ?

-अच्छा खाना खाए, गर्मियों में गन्ने के जूस भी सोच समझ कर पीएं, यह पेट में गैस्ट्रिक दिक्क्क्त पैदा कर सकता है। चाट, टिक्कियों और गोल गप्पों से भी परहेज करें हो सके तो अपनी निगरानी में बने स्वच्छ खाने को ही खाएं। वासी खाना न खाएं, कई होटल्स में भी में वासा खाना परोस दिया जाता है। इससे पेट में कीटाणु बन जाते हैं और एसिड कंटेंट बढ़ जाते हैं। फ्रेश खाना खाएं, बाहर टंगे हुए खाने से परहेज करें। स्वयं उपचार करने से पहले डाक्टर के पास जाना जरूरी समझें।

 

 

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