शिमला: एंबुलेंस कर्मियों को दोबारा नौकरी नहीं देने से सीएम हैरान, बोले- अभी तक क्यों नहीं हुए आदेश * ENTV

शिमला: एंबुलेंस कर्मियों को दोबारा नौकरी नहीं देने से सीएम हैरान, बोले- अभी तक क्यों नहीं हुए आदेश

108 और 102 एंबुलेंस चला रहे 300 कर्मियों को 11 साल बाद नौकरी से निकाले जाने के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं देने पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर खुद हैरान हो गए। सीएम जयराम ठाकुर बोले कि उन्होंने दोबारा रखने को कहा था, क्या इसके बावजूद ऐसा हुआ है। अफसरशाही और कंपनी ने आदेश नहीं माने हैं। सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि इस मामले को सहानुभूतिपूर्वक देख जा रहा है। सीएम के आश्वासन के बावजूद ये कर्मचारी पीटरहॉफ के बाहर डटे रहे और उन्होंने एलान किया कि जब तक उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं दिया, तब तक वे शिमला से घर नहीं लौटेंगे। इनमेें से कई कर्मचारी तो चंबा, ऊना समेत प्रदेश के कई दूरदराज इलाकों से आए।

सोमवार को राज्य अतिथि गृह पीटरहॉफ शिमला में अंदर विधायक प्राथमिकता बैठक चल रही थी। बाहर परिसर में सुबह से लेकर शाम पांच बजे तक 108 और 102 एंबुलेंस कर्मी डटे हुए थे। ये मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिलने की जिद्द पर अडे़ रहे। 108 और 102 अनुबंध कर्मचारी संघ के अध्यक्ष पूर्ण चंद ने कहा कि इन कार्यरत कर्मचारियों ने पिछले 11 साल मेें सेवा भाव और ईमानदारी से काम किया है। हिमाचल सरकार ने जीवीके एमआरआई कंपनी के साथ करारनामा खत्म कर दिया है। नई कंपनी मेड स्वान को 108, 102 एंबुलेंस, वीएलएस और एएलएस गाड़ियां चलाने के लिए आगामी करारनामा हुआ है। नई कंपनी ने करीब 300 पुराने कर्मचारियों को निकाल दिया है। के नेतृत्व में मांग की। धरना दिया।

24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। कंपनी ने ऑफर लेटर दिए हैं। पूर्ण चंद ने कहा कि यह कंपनी नए कर्मचारियों को रख रही है। इन्होंने दिन-रात और कोविड के समय में अपनी सेवाएं दी हैं। यूनियन ने मांग की कि कर्मचारियों को उसी स्थान पर काम पर रखा जाए, जहां ये पूर्व में कार्यरत रहे हैं। सरकार ने सभी ईएमटी और पायलट का प्रशिक्षण करने के लिए सरकारी धन का इस्तेमाल किया है। कर्मचारियों को अथारिटी अथवा न्यायालय की ओर से तय वेतन दिया जाए। साढे़ 18 हजार तय हुए हैं। ये 15 हजार रुपये देने हैं। सोलन की समन्वयक रचना ठाकुर ने सीएम के आश्वासन से असंतोष जताते हुए कहा कि उन्हें आश्वासन नहीं, नियुक्ति पत्र चाहिए। मुख्यमंत्री के क्षेत्र सराज से लाल कृष्ण भी आए। उन्होंने भी उन्हें अपनी मांगें बताईं।

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