न्यूक्लियर तबाही मचाने की तैयारी में यूक्रेन, जल्द शुरू करेगा ऑपरेशन, रूस ने किया बड़ा

रूस: रूस की तरफ से बार-बार न्यूक्लियर अटैक को लेकर बयान सामने आते रहते हैं. उसे हर बार अपनी न्यूक्लियर पॉलिसी को जस्टीफाई करना पडता है. ऐसा इसलिए क्योंकि दुनिया पुतिन को अनप्रेडिक्टेबल समझती है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि रूस यूक्रेन वॉर जोन में जाने के बाद कुछ भी कर सकता है. वॉर को खत्म करने के लिए टैक्टिकल न्यूक्लियर वैपन का भी इस्तेमाल कर सकता है. हालांकि आज इसी न्यूक्लियर फ्रंट पर रूस की तरफ से यूक्रेन को लेकर इस तरह की बातें की गई.

रूस का कहना है कि 19 अगस्त के लिए यूक्रेन किसी बड़े फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है और इस ऑपरेशन के जरिए न्यूक्लियर त्रासदी मच सकती है. रूसी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कैमरे के सामने आते ही 19 अगस्त का नाम ले दिया और इसे न्यूक्लियर डिजास्टर से जोड़ दिया. यूक्रेन की सरकार यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की यूक्रेन यात्रा के दौरान 19 अगस्त को जेपोरिजिया न्यूक्लियर प्लांट में उकसावे की कार्रवाई कर सकती है और इस न्यूक्लियर डिजास्टर के लिए फिर रूस को जिम्मेदार ठहराया जाएगा.

UN महासचिव ने जेलेंस्की से की मुलाकात

रूस का साफ कहना है कि यूएन महासचिव यूक्रेन में है. इसीलिए यूक्रेन फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है. इसके जरिए दुनिया को न्यूक्लियर तबाही की तरफ ले जाने की तैयारी कर रहा है. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटारेस ने यूक्रेन के ल्वीव में राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात की. उन्होंने एक बार फिर रूस से मिलिट्री ऑपरेशंस बंद करने की अपील की. हालांकि इन सबके बीच यूक्रेन ने भी अचानक न्यूक्लियर डिजास्टर की तैयारी शुरू कर दी.

क्या है यूक्रेन की तैयारी?

जेपोरिजिया में यूक्रेन के इमरजेंसी वर्कर्स ने न्यूक्लियर ड्रिल को अंजाम दिया है. रेडिएशन लीक को ध्यान में रखते हुए न्यूक्लियर डिजास्टर ड्रिल की गई है. इस दौरान इमरजेंसी वर्कर्स लोगों को गाइड करते और प्रोटेक्टिव गियर पहनाते दिखाई दिए. इसके अलावा, कुछ लोगों का डमी के तौर पर रेडिएशन एक्सपोजर को लेकर ट्रीटमेंट भी किया गया. रूस के न्यूक्लियर एक्सपर्ट्स का तो ये भी दावा है कि अगर किसी वजह से रेडिएशन लीक हुआ तो फिर यूरोप के 9-12 देशों पर असर पड़ेगा. रेडिएशन एक्सपोज़र तुर्की, बुल्गारिया, रोमानिया, स्लोवाकिया, चेक रिपब्लिक, पोलैंड, बाल्टिक देशों के साथ नार्वे, स्वीडन और डेनमार्क जैसे देशों तक भी पहुंच सकती है. लाखों को बीमार कर सकती है. हजारों की जान जा सकती है.

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